ध्यान गुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी ने बनाया विश्व का सबसे बड़ा 5210 किलो का पारद शिवलिंग; हरिद्वार में महाशिवरात्रि पर विशेष पूजन
हरिद्वार, प्रतिनिधि : विश्व का सबसे बड़ा 5210 किलोग्राम वजनी पारद ध्यान लिंगम महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हरिद्वार में विधिवत पूजन के साथ स्थापित किया गया। इस भव्य पारद शिवलिंग का निर्माण गिरनार के ध्यान गुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी…
मरने के लिए सात मिनट – गिग इकोनॉमी के टूटते शरीर
हैदराबाद (तेलंगाना), फरवरी 16: Orchestro.AI, के संस्थापक और CEO शेखर नटराजन इस लेख में बताते हैं कि कैसे एल्गोरिदम ने गिग इकोनॉमी को प्रभावित किया है। एल्गोरिद्म ने मोहम्मद रिज़वान को सात मिनट दिए। भारत के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी फूड डिलीवरी…
फार्मासिस्ट की नौकरी से मालिकाना सोच तक – SOS जनहित मेडिकल का अगला कदम
मध्य प्रदेश. हेल्थकेयर सेक्टर में तेजी से उभर रहे SOS जनहित मेडिकल ने एक अनोखी पहल करते हुए अपने कुछ फार्मासिस्ट कर्मचारियों को रोजगार से आगे बढ़ाकर अपने ही ब्रांड नाम के साथ फार्मेसी व्यवसाय शुरू करने का अवसर प्रदान किया…
निवेशक वेरिफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए सेबी (SEBI) और एनएसडीएल (NSDL) ने शुरू किया ‘ऑटो रिक्शा अभियान’
मुंबई: निवेशक जागरूकता को अधिक प्रभावी और आम लोगों से जोड़ने के प्रयास में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के साथ मिलकर एक बहु-शहरी सार्वजनिक जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के…
Dhol Matrimony ने AI-पावर्ड, स्कैम-रेसिस्टेंट और प्राइवेसी-फर्स्ट प्लेटफॉर्म के साथ ऑनलाइन मैचमेकिंग को नया आयाम दिया
भारत, 14 फरवरी : ऐसे समय में जब कई ऑनलाइन मैट्रिमोनी प्लेटफॉर्म फेक प्रोफाइल, प्राइवेसी ब्रीच और स्पैम–ड्रिवन एंगेजमेंट मॉडल को लेकर सवालों के घेरे में हैं, ढोल मैट्रिमोनी खुद को अगली पीढ़ी के AI-पावर्ड मैचमेकिंग इकोसिस्टम के रूप में पेश…
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में Dr. Cancer पहल का लोगो लॉन्च किया
लखनऊ (उत्तर प्रदेश), फरवरी 13 : उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में ‘Dr. Cancer’पहल के आधिकारिक लोगो का लोकार्पण किया।इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, सामाजिक प्रतिनिधि और आयोजन से संबंधित टीम मौजूद रही। लोगो लॉन्च के दौरान उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कैंसर की समय पर पहचान (Early Detection), जन–जागरूकता और मरीजों को सहयोग स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हैं।उन्होंने पहल से जुड़ी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से समुदाय स्तर पर जागरूकता और सपोर्ट सिस्टम मजबूत होता है। इस पहल के संबंध में‘Dr. Cancer’ और संवेदना होम्योपैथिक क्लिनिक के निदेशक डॉ. गौरीशंकर ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कैंसर जागरूकता, स्क्रीनिंग/रिफरल मार्गदर्शन, तथा मरीजों की गुणवत्ता–जीवन (Quality of Life) बेहतर करने के लिए सपोर्टिव केयर से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाना है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी मरीज के लिए उपचार निर्णय योग्य चिकित्सकों की सलाह और स्थापित मेडिकल प्रोटोकॉल केअनुसार ही होने चाहिए। कार्यक्रम में सीनियर फिजिशियन डॉ. अमित श्रीवास्तव और श्री राम मोहन अग्रवाल ने आगामी राज्य व्यापी जागरूकता और स्क्रीनिंग कैंप की रूपरेखा साझा की।टीम ने बताया कि कैंपेन के तहत जन–जागरूकता, परामर्श/मार्गदर्शन, और जरूरतमंद मरीजों को सहायता नेटवर्क से जोड़ने पर फोकस कियाजाएगा। अंत में उपमुख्यमंत्री को स्मृति–चिह्न भेंट किया गया और कैंसर जागरूकता से जुड़े विभिन्न सामाजिक व स्वास्थ्य पहलुओं पर चर्चा हुई।
एसजीटी यूनिवर्सिटी ने छात्रवृत्ति वितरण समारोह आयोजित किया
गुरुग्राम (हरियाणा), फरवरी 13: श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्राइसेन्टीनरी यूनिवर्सिटी (एसजीटी यूनिवर्सिटी), गुरुग्राम ने अपने स्कॉलर्स काउंसिल के सहयोग से, सफलतापूर्वक छात्रवृत्ति वितरण समारोह आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य योग्य और प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित करना और उन्हें प्रोत्साहित…
यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग 5) ठाकुर दलीप सिंघ जी
जिन पाठकों को मेरी निम्नलिखित बातें बुरी लगें, उन को यह तथ्य स्वीकार करना चाहिए कि हम मानवों ने पूरी पृथ्वी के जीवों पर अत्याचार कर के, उन पर अपना साम्राज्य स्थापित किया हुआ है। “अवर जोनि तेरी पनिहारी॥ इसु…
भूली-बिसरी विरासत में नई जान: हरि चंदना आईएएस की दृष्टि
हैदराबाद (तेलंगाना) : हैदराबाद के ऐतिहासिक उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में स्थित अतीत की एक भूली हुई धरोहर— मह लका बाई बावड़ी — आज दशकों की उपेक्षा के बाद पुनर्जीवित होकर फिर से अपने वैभव में खड़ी है। कभी मलबे से भरी और समय की धूल में खोई यह 18वीं सदी की संरचना अब सावधानीपूर्वक संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्जीवन के माध्यम से एक जीवंत विरासत स्थल में बदल चुकी है। इस पुनरुत्थान के केंद्र में हैं हरि चंदना आईएएस, जिनकी प्रशासनिक सोच निरंतर स्थिरता, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ती रही है। यह बावड़ी का पुनर्जीवन कोई एकल उपलब्धि नहीं, बल्कि तेलंगाना भर में विरासत संरक्षण की उस निरंतर परंपरा का हिस्सा है, जिसे उन्होंने नेतृत्व प्रदान किया है।इस नवजागरण के केंद्र में वही अधिकारी हैं, जिनकी प्रशासनिक यात्रा ने तेलंगाना में उपेक्षित स्थानों को जीवंत सार्वजनिक संपत्तियों में बदला है। शहर की विरासत: जीएचएमसी के वर्ष जिला प्रशासन में आने से पहले, हरि चंदना आईएएस ने ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) में ज़ोनल कमिश्नर के रूप में हैदराबाद के शहरी परिदृश्य को आकार दिया — जहाँ स्थिरता और विरासत संरक्षण दैनिक शासन के मूल तत्व बने। इस दौर की सबसे प्रतीकात्मक विरासत बहाली में से एक थी बांसिलालपेट बावड़ी — हैदराबाद के पुराने शहर में स्थित 17वीं सदी की बावड़ी, जो दशकों तक कचरे और उपेक्षा में दबी रही थी।इस बहाली ने एक कचरे से भरे गड्ढे को मनमोहक विरासत स्थल में बदल दिया — प्राचीन पत्थर की सीढ़ियाँ फिर खुलीं, पारंपरिक स्थापत्य बहाल हुआ और बावड़ी को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सार्वजनिक जीवन में लौटाया गया। यह उस समय GHMC में आए व्यापक बदलाव को भी दर्शाता था: ऐतिहासिक सार्वजनिक स्थलों की पुनर्प्राप्ति पारंपरिक जल संरचनाओं का पुनर्जीवन शहरी विकास में स्थिरता का समावेश यही शहरी विरासत जागरण आगे चलकर नारायणपेट जिले में नेतृत्व किए गए व्यापक बावड़ी पुनर्जीवन आंदोलन की नींव बना। नारायणपेट में जिला–स्तरीय विरासत जागरण नारायणपेट की कलेक्टर बनने पर उनकी सोच का पूर्ण रूप सामने आया — एक ऐसा क्षेत्र जो ऐतिहासिक बावड़ियों से समृद्ध था, पर लंबे समय से उपेक्षित रहा। बाराम बावड़ी — जहाँ से पुनर्जीवन की शुरुआत हुई पहली बड़ी सफलताओं में से एक थी बाराम बावड़ी, जो सदियों पुरानी होते हुए भी कचरे और उपेक्षा में दबी हुई थी।उनके नेतृत्व में: मलबा हटाया गया मूल पत्थर संरचना का संरक्षण किया गया सामुदायिक स्वामित्व को पुनर्स्थापित किया गया परिणाम असाधारण रहे — त्योहार लौटे, परिवार जुटने लगे और बावड़ी ने फिर से जल स्रोत और सामाजिक केंद्र की अपनी भूमिका हासिल की।यह केवल बहाली नहीं थी।यह सार्वजनिक जीवन में पुनर्जन्म था। प्राचीन बावड़ियों के भूले हुए नेटवर्क की पुनः खोज बाराम बावड़ी के पुनर्जीवन ने एक व्यापक पहल को जन्म दिया।हरि चंदना ने नारायणपेट जिले में दर्जनों प्राचीन बावड़ियों के दस्तावेज़ीकरण और चरणबद्ध पुनर्स्थापन की शुरुआत की — जिनमें से कई पीढ़ियों से ओझल थीं। ये केवल सौंदर्यात्मक सफाई अभियान नहीं थे।इनका फोकस था: पारंपरिक संरक्षण तकनीकें भूजल पुनर्भरण सामुदायिक संरक्षकता…






